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Katyayani Krishi Direct

कात्यायनी धान त्रिशूल कॉम्बो | जड़ विकास और अधिक कल्ले के लिए सर्वोत्तम

कात्यायनी धान त्रिशूल कॉम्बो | जड़ विकास और अधिक कल्ले के लिए सर्वोत्तम

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मात्रा

Product Description


कात्यायनी पैडी त्रिशूल कॉम्बो धान की फसल के लिए एक संपूर्ण प्रारंभिक समाधान है। यह कॉम्बो जड़ों की तेज़ वृद्धि, अधिक टिलरिंग (कल्ले) और पौधे की शुरूआती मजबूती सुनिश्चित करता है।
इसमें मौजूद ह्युमिक + फुल्विक एसिड 98% मिट्टी की गुणवत्ता सुधारता है और जड़ों को मज़बूत बनाता है।
जिंक सल्फेट 33% पत्तों के पीलेपन और खैरा रोग को नियंत्रित करता है।
वहीं, कात्यायनी फैंटास्टिक जीआर (क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 0.4%) पत्ती लपेटने वाले कीट, तना छेदक और अंकुर कीटों से सुरक्षा देता है।
सर्वश्रेष्ठ परिणामों के लिए, बुआई या रोपाई के 10–15 दिनों के अंदर खाद की पहली खुराक के साथ इस कॉम्बो को मिलाकर खेत में समान रूप से छिड़काव करें।

कॉम्बो डिटेल्स

उत्पाद का नाम

तकनीकी नाम

पैकिंग

लक्ष्य कीट/रोग

मात्रा

कात्यायनी फैंटास्टिक

क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 0.4% जीआर 

4 किग्रा × 1

तना छेदक, लीफ फोल्डर, शूट बोरर

4 किग्रा/एकड़

कात्यायनी एक्टिवेटेड ह्युमिक + फुल्विक

ह्युमिक एसिड + फुल्विक एसिड 98%

1 किग्रा × 2

कमजोर मिट्टी, जड़ विकास की कमी, पोषण अवशोषण में कमी, कम टिलरिंग

2 किग्रा/एकड़

कात्यायनी जिंक सल्फेट 33% उर्वरक

जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट (Zn 33%)

1 किग्रा × 5

पीले पत्ते, खैरा रोग, धीमी वृद्धि

4–5 किग्रा/एकड़

उत्पाद-वार लाभ

कात्यायनी एक्टिवेटेड ह्युमिक + फुल्विक एसिड (1 किग्रा × 2)

  • जड़ें गहरी और मज़बूत बनाता है।
  • मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाता है।
  • टिलरिंग (कल्ले) की संख्या को बढ़ावा देता है।
  • पौधों को वातावरणीय तनाव से लड़ने में मदद करता है।
    मात्रा: 2 किग्रा/एकड़ (मिट्टी में छिड़काव)

 कात्यायनी जिंक सल्फेट 33% उर्वरक (1 किग्रा × 5)

  • खैरा रोग और पत्तों के पीलेपन को रोकता है।
  • पत्तियों में हरित लवक निर्माण को सुधारता है।
  • अधिक टिलरिंग और संतुलित वृद्धि को बढ़ावा देता है।
  • मात्रा: 4–5 किग्रा/एकड़ (मिट्टी में प्रयोग करे)

कात्यायनी फैंटास्टिक (क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 0.4%) (4 किग्रा × 1)

  • तना छेदक, अंकुर कीट, लीफ फोल्डर जैसे कीटों से लंबे समय तक सुरक्षा देता है।
  • सिस्टमिक क्रिया द्वारा कीट को अंदर से खत्म करता है।
  • पौधे की शक्ति और टिलरिंग (कल्ले) को बढ़ाता है।
  • फसल की स्थापना के सबसे संवेदनशील चरण में सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • मात्रा: 4 किग्रा/एकड़ (मिट्टी में छिड़काव)

क्यों चुनें पैडी त्रिशूल कॉम्बो?

  • मज़बूत जड़ें और अधिक कल्ले
  • जिंक की पूर्ति और खैरा रोग से सुरक्षा
  • कीटों से शुरुआती सुरक्षा
  • एक कॉम्बो में सम्पूर्ण देखभाल
  • धान के शुरुआती चरण के लिए वैज्ञानिक रूप से अनुकूल
  • खर्च, समय और ट्रायल की परेशानी से मुक्ति

 उपयोग निर्देश

  • बुआई या रोपाई के 10–15 दिनों के भीतर, पहली खाद की खुराक के साथ प्रयोग करें।
  • DAP खाद के साथ सीधे न मिलाएं। यदि DAP देना हो तो इस कॉम्बो से पहले या बाद में 7–10 दिन का अंतर रखें।
  • आवश्यक हो तो खाद के बिना भी केवल इस कॉम्बो को प्रयोग कर सकते हैं।
  • तीनों उत्पादों को अच्छी तरह मिलाएं और पूरे खेत में समान रूप से छिड़कें।
  • भारी बारिश के समय न छिड़कें।
  • छिड़काव के बाद हल्की सिंचाई करें ताकि उत्पाद मिट्टी में अच्छे से समा जाए। 

धान में कल्ले और पैदावार बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल

Q1. धान में कल्ले बढ़ाने के लिए कौन सी दवा सबसे अच्छी है?

धान में अधिक कल्ले बढ़ाने के लिए कात्यायनी धान त्रिशूल कॉम्बो एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें ह्यूमिक + फुल्विक एसिड 98% होता है जो जड़ें मजबूत बनाकर कल्लों की संख्या तेजी से बढ़ाता है।

Q2. धान में कौन सा टॉनिक डालना चाहिए जिससे जड़ें मजबूत हों और कल्ले बढ़ें?

 

शुरुआती अवस्था में ह्यूमिक एसिड, ज़िंक सल्फेट और कीटनाशक का कॉम्बिनेशन वाला टॉनिक जैसे कात्यायनी त्रिशूल कॉम्बो डालना चाहिए। यह जड़ों की गहराई बढ़ाता है और मजबूत कल्ले तैयार करता है।

Q3. धान में ज्यादा कल्ले कैसे बढ़ाएं?

 

बुवाई/रोपाई के 10-15 दिन के भीतर ह्यूमिक एसिड + ज़िंक सल्फेट + फैंटास्टिक GR का इस्तेमाल करें। इससे धान की जड़ों का विकास होता है और कल्ले अधिक मात्रा में निकलते हैं।

Q4. धान की पैदावार कैसे बढ़ाएं?

धान की अधिक पैदावार के लिए सही समय पर पोषक तत्वों और कीटनाशकों का प्रयोग करें। जिससे उपज में 20–30% तक बढ़ोतरी हो सकती है।

Q5. धान में ज़िंक की कमी के क्या लक्षण होते हैं?

धान की पत्तियां पीली पड़ना, धीमी ग्रोथ और कल्लों की कमी – ये ज़िंक की कमी के संकेत हैं। इसका इलाज कात्यायनी जिंक सल्फेट 33% उर्वरक से करें जो इस कॉम्बो में शामिल है।

Q6. धान में खैरा रोग कैसे ठीक करें?

खैरा रोग का मुख्य कारण ज़िंक की कमी होता है। इसे रोकने के लिए ज़िंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट 33% का प्रयोग करें जो कात्यायनी त्रिशूल कॉम्बो का हिस्सा है और पीलापन खत्म कर पत्तियों को हरा-भरा बनाता है।

Q7. क्या कात्यायनी त्रिशूल कॉम्बो का प्रयोग सभी धान की किस्मों में किया जा सकता है?

हाँ, यह कॉम्बो भारत की सभी प्रमुख धान की किस्मों (हाइब्रिड, बासमती और परमल  आदि) में उपयोग के लिए उपयुक्त है और शुरुआती वृद्धि को बेहतर बनाता है

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