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कात्यायनी विल्ट कंट्रोल कॉम्बो केमिकल
कात्यायनी विल्ट कंट्रोल कॉम्बो केमिकल
Product Description
कात्यायनी विल्ट कंट्रोल कॉम्बो केमिकल मुरझान (विल्ट) तथा अन्य मिट्टी जनित फफूंदजनित रोगों के प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया एक शक्तिशाली समाधान है। मिट्टी जनित रोग जड़ों को नुकसान पहुंचाकर पोषक तत्वों के अवशोषण, पौधों की वृद्धि एवं उत्पादन क्षमता को प्रभावित करते हैं।
यह कॉम्बो थायोफिनेट मिथाइल की शक्तिशाली फफूंदनाशी क्षमता तथा ह्यूमिक + फुल्विक के जड़ विकास एवं पोषण लाभों का प्रभावी संयोजन है। यह जड़ों को रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है, स्वस्थ जड़ विकास को बढ़ावा देता है, पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार करता है तथा फसल की समग्र वृद्धि एवं उत्पादकता बढ़ाने में सहायता करता है।
कॉम्बो विवरण
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उत्पाद का नाम |
पैकिंग |
मात्रा |
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कात्यायनी केटीएम ( थायोफिनेट मिथाइल 70% डब्ल्यूपी) |
250 ग्राम × 2 |
300-400 ग्राम प्रति एकड़ |
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कात्यायनी ह्यूमिक + फुल्विक |
1 किलोग्राम × 2 |
2 किलोग्राम प्रति एकड़ |
कात्यायनी केटीएम ( थायोफिनेट मिथाइल 70% डब्ल्यूपी)
कात्यायनी केटीएम एक प्रणालीगत फफूंदनाशी है, जो मुरझान तथा अन्य प्रमुख मिट्टी जनित फफूंदजनित रोगों के प्रभावी नियंत्रण के लिए उपयोग किया जाता है।
लाभ
- मुरझान एवं मिट्टी जनित रोगों का प्रभावी नियंत्रण
- जड़ों को फफूंदजनित संक्रमण से सुरक्षा
- रोगों के विरुद्ध लंबी अवधि तक सुरक्षा प्रदान करता है
- स्वस्थ जड़ स्थापना में सहायता करता है
- फसल की वृद्धि एवं स्वास्थ्य में सुधार करता है
मात्रा
- मृदा उपचार: 300-400 ग्राम प्रति एकड़
कात्यायनी ह्यूमिक + फुल्विक
कात्यायनी ह्यूमिक + फुल्विक एक उन्नत मृदा सुधारक एवं जड़ विकास प्रवर्धक है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर पौधों को पोषक तत्वों की बेहतर उपलब्धता प्रदान करता है।
लाभ
- सफेद एवं स्वस्थ जड़ों के विकास को बढ़ावा देता है
- पोषक तत्वों के अवशोषण की क्षमता बढ़ाता है
- मिट्टी की संरचना एवं उर्वरता में सुधार करता है
- पौधों की स्फूर्ति एवं तनाव सहनशीलता बढ़ाता है
- स्वस्थ वानस्पतिक वृद्धि को प्रोत्साहित करता है
मात्रा
- मृदा उपचार: 2 किलोग्राम प्रति एकड़
कॉम्बो के प्रमुख लाभ
- मुरझान रोग का प्रभावी नियंत्रण
- मिट्टी जनित रोगों का व्यापक प्रबंधन
- सफेद एवं स्वस्थ जड़ों का बेहतर विकास
- पोषक तत्वों के अवशोषण एवं उपयोग में वृद्धि
- जड़ों के स्वास्थ्य एवं स्थापना में सुधार
- मृदा उर्वरता में वृद्धि
- बेहतर फसल वृद्धि एवं विकास
- अधिक उत्पादन क्षमता एवं लाभप्रदता


