25 की सबसे बेहतरीन सोयाबीन वैरायटी | ज्यादा उत्पादन देने वाली नई किस्में

सोयाबीन की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है: 2026-27 बुवाई के लिए वैरायटी सूची

सोयाबीन की सबसे अच्छी किस्म कोई एक नहीं होती, क्षेत्र और बुवाई की तारीख तय करती है। ICAR से पुष्ट विकल्पों में NRC 86, NRC 157, NRC 131 और JS 20-29 लगभग 93-97 दिन में पकती हैं, और उपज करीब 15 से 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है।

अपडेट: अक्टूबर 2026

सोयाबीन की सबसे अच्छी किस्म चुनने के लिए अगले खरीफ (2026-27 बुवाई) में बीज बुक करने से पहले यह सूची देखें। इसमें सिर्फ वही किस्में हैं जिनका आंकड़ा किसी सरकारी या विश्वविद्यालय स्रोत में मिला। बुवाई, खाद और कीट-रोग की पूरी जानकारी सोयाबीन की खेती वाले लेख में है।

सोयाबीन की किस्म कैसे चुनें

सोयाबीन की सबसे अच्छी किस्म वही है जो आपके क्षेत्र, बुवाई की तारीख और खेत के रोग के हिसाब से बैठे। किस्म चुनते समय पहले तीन बातें देखें: आपके जिले में वह अनुशंसित है या नहीं, बुवाई कब होगी, और पिछले साल खेत में कौन सा रोग आया था। उपज का आंकड़ा सबसे आखिर में देखें।

  • क्षेत्र की अनुशंसा: एक किस्म हर राज्य के लिए अधिसूचित नहीं होती। जिस राज्य या जोन के लिए जारी हुई हो, वहीं सबसे भरोसेमंद चलती है।
  • बुवाई की तारीख: मानसून देर से आए तो कम अवधि वाली किस्म बेहतर रहती है। ICAR-IISR के अनुसार NRC 157 देर से बुवाई में (20 जुलाई तक) कम नुकसान दिखाती है।
  • रोग का इतिहास: पीला मोज़ेक, चारकोल रोट या पत्ती के धब्बे जिस खेत में बार-बार आए, वहां उसी रोग में सहनशील किस्म चुनें।
  • दो से तीन किस्में: सारा रकबा एक ही किस्म में न लगाएं। अलग-अलग पकने के दिन वाली किस्में लगाने से कटाई का समय बंटता है और जोखिम भी।

सोयाबीन की किस्मों की सूची: पकने के दिन, उपज और क्षेत्र

नीचे की सारणी में दिन और उपज प्रति हेक्टेयर के औसत आंकड़े हैं, जैसा संबंधित संस्था ने बताया। एकड़ में अनुमान के लिए संख्या को लगभग 2.5 से भाग दें। ये परीक्षण आधारित औसत हैं, आपके खेत में किस्म, बारिश और प्रबंधन के हिसाब से फर्क आएगा।

किस्म पकने के दिन (लगभग) औसत उपज (क्विंटल/हे) क्षेत्र / खास बात
NRC 86 (अहिल्या-6) 95-97 लगभग 21 महाराष्ट्र, म.प्र., उ.प्र., राजस्थान, गुजरात; चारकोल रोट में उच्च प्रतिरोधी, चक्र भृंग में मध्यम से अच्छी सहनशीलता
NRC 157 94 16.5 म.प्र. की अनुशंसा; पत्ती धब्बों में मध्यम प्रतिरोधी; 20 जुलाई तक की देर बुवाई में कम नुकसान
NRC 131 93 15 म.प्र. की अनुशंसा; चारकोल रोट और टार्गेट लीफ स्पॉट में मध्यम प्रतिरोधी
NRC 136 105 17 म.प्र. और पूर्वी क्षेत्र; सूखा सहनशील मानी गई, MYMV में मध्यम प्रतिरोधी
JS 20-29 (JNKVV) 93-96 लगभग 21 2014 में अधिसूचित; मध्य क्षेत्र के लिए
MACS 1407 (ARI पुणे) 104 शोध में 39 तक का आंकड़ा असम और पूर्वोत्तर के वर्षा आधारित क्षेत्र; तेल लगभग 19.8%; कई कीटों में सहनशील बताई गई
NRC 37 (अहिल्या-4) स्रोत में नहीं मिला लगभग 22.8 मध्य गुजरात, 2017 में अनुशंसित; तेल लगभग 19.2%
AMS-1001 (पंदेकृवि येलो गोल्ड) मध्यम अवधि क्विंटल आंकड़ा स्रोत में नहीं महाराष्ट्र; चारकोल रोट और YMV में अत्यधिक प्रतिरोधी बताई गई

MACS 1407 का 39 क्विंटल वाला आंकड़ा अनुसंधान परीक्षण का है और इसे किसान खेत की औसत उपज नहीं मानना चाहिए। साथ ही इसकी अनुशंसा पूर्वोत्तर के लिए है, मध्य भारत के लिए नहीं, इसलिए वहां के किसान अपने KVK से पूछे बिना न लें।

जल्दी पकने वाली सोयाबीन की कौन सी किस्म है

सूची में सबसे कम दिन वाली किस्में NRC 131 (लगभग 93 दिन), NRC 157 (94 दिन) और JS 20-29 (93-96 दिन) हैं। जल्दी पकने वाली किस्म का फायदा यह है कि उसके बाद रबी में गेहूं या चना समय पर लगाया जा सकता है। गेहूं के पोषण का हिसाब देखना हो तो गेहूं में खाद कब डालें वाला लेख देखें।

कई किसान 'जल्दी पकने वाली' किस्म को कम जोखिम वाली मान लेते हैं। हमेशा ऐसा नहीं है: जल्दी वाली किस्म को पूरा दाना भराव कम दिनों में करना होता है, इसलिए फूल और फली के समय नमी और पोषण की कमी का असर ज्यादा दिखता है। ध्यान रखें कि 'जल्दी' का मतलब बहुत जल्दी बुवाई नहीं है। दाना बनते समय पानी की कमी और कम बारिश के सालों में कम अवधि वाली किस्म की उपज दबाव में आ सकती है।

रोग और कीट सहनशील किस्में कौन सी हैं

सहनशील का मतलब रोग-मुक्त नहीं होता। सूची में जिन किस्मों के आगे प्रतिरोध लिखा है वह परीक्षण में मिली मध्यम या उच्च सहनशीलता है। खेत में नमी ज्यादा या फसल घनी हो तो रोग फिर भी लग सकता है।

  • पीला मोज़ेक (YMV/MYMV): AMS-1001 में अत्यधिक प्रतिरोधी (महाराष्ट्र के लिए), NRC 136 में मध्यम। विषाणु सफेद मक्खी फैलाती है, इसलिए किस्म के साथ मक्खी पर भी निगरानी जरूरी है।
  • चारकोल रोट: NRC 86 में उच्च प्रतिरोधी, NRC 131 में मध्यम। सूखे और गर्मी के तनाव में यह रोग बढ़ता है।
  • चक्र भृंग: NRC 86 में मध्यम से अच्छी सहनशीलता बताई गई।

जहां पीला मोज़ेक हर साल आता है, वहां बुवाई के बाद वाले दिनों में सफेद मक्खी की जांच करें और जरूरत पड़े तो Soybean All In One Combo जैसा चरण-वार किट देखा जा सकता है। इसमें Antivirus Viricide 500 मिली और Dualfen 250 मिली प्रति एकड़ जैसी लेबल डोज़ दी गई हैं; समय और मात्रा पैक के अनुसार रखें।

सोयाबीन कितने प्रकार की होती है

सोयाबीन की किस्मों को तीन आधार पर बांटा जाता है: पकने की अवधि, पौधे की बढ़वार का तरीका और इस्तेमाल।

आधार प्रकार मतलब
पकने की अवधि जल्दी, मध्यम, देर शोध में सामान्यतः 95 दिन तक जल्दी, 96-105 दिन मध्यम, 105 से ऊपर देर मानी जाती है
बढ़वार निश्चित (determinate), अर्ध-निश्चित निश्चित बढ़वार में फूल आने पर ऊंचाई लगभग रुक जाती है, अर्ध-निश्चित में कुछ बढ़ती रहती है
इस्तेमाल तिलहन, प्रोटीन, खाद्य अधिकतर किस्में तेल और खली के लिए हैं, तेल लगभग 19-20%

मशीन कटाई करने वालों के लिए फली जमीन से ऊपर लगने वाली और गिरने से बचने वाली किस्म ज्यादा सुविधाजनक रहती है। यह बात किस्म के विवरण में देखकर ही चुनें।

सोयाबीन का असली बीज कैसे पहचानें और बीज उपचार कैसे करें

प्रमाणित बीज की थैली पर टैग लगा होता है, जिसमें किस्म का नाम, लॉट नंबर, अंकुरण प्रतिशत और जांच की तारीख लिखी होती है। टैग न हो तो थैली न लें। बिल सुरक्षित रखें।

  • अंकुरण जांच: 100 दाने गीले कपड़े में 4-5 दिन रखें; 70% से ऊपर अंकुरण होना चाहिए। सोयाबीन का बीज जल्दी जान खोता है, इसलिए पिछले साल का रखा बीज बिना जांच न बोएं।
  • बीज दर: सामान्यतः 25-30 किलो प्रति एकड़; दाना बड़ा हो तो ऊपरी सीमा।
  • हर 3-4 साल में बीज बदलें: खुद का बीज रखने से रोग संवेदनशीलता और शुद्धता दोनों घटती हैं।

बुवाई से पहले बीज उपचार जरूर करें। Katyayani seed treatment kit में थायोमेथोक्सम 30% FS और टेबुकोनाज़ोल 2% DS हैं, और लेबल पर सोयाबीन दर्ज है। लेबल मात्रा 3 मिली और 1 से 1.25 ग्राम प्रति किलो बीज है। सोयाबीन में राइज़ोबियम कल्चर लगाना भी जरूरी माना जाता है; इसे रसायन सूखने के बाद लगाएं। Rhizobium जैव उर्वरक का लेबल सोयाबीन के लिए बना है, और इसकी मात्रा 50 किलो जैविक खाद में 1-3 लीटर है। विस्तृत क्रम के लिए खेती वाले लेख का बीज उपचार भाग पढ़ें।

सुरक्षा का ध्यान रखें। उपचारित बीज को हाथ से छूने पर दस्ताने पहनें, बचा बीज खाने या पशुओं को न दें और थैली बच्चों से दूर रखें।

जो नाम सुने हैं, पर यहां पुष्टि नहीं हो सकी

बाजार में JS 20-34, JS 95-60, JS 93-05, JS 335 और कई नई 'JS 21' या 'NRC' नंबर वाली किस्मों के नाम चलते हैं। इनमें से कुछ के दिन और उपज के आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में मेल नहीं खाते। उदाहरण के लिए JS 20-34 को एक जगह जल्दी और बाजार की सूची में मध्यम (95-110 दिन) बताया गया है। ऐसे आंकड़े यहां नहीं लिखे गए।

किसी किस्म का नाम सुनकर बीज न खरीदें। अपने जिले के KVK या कृषि विभाग से पूछें कि इस साल कौन सी किस्म अनुशंसित है और बीज किस प्रमाणित स्रोत पर मिलेगा। बीज की कीमत यहां नहीं दी जा रही, वह स्थान और सीजन पर निर्भर है।

अगला कदम

अपने जिले की अनुशंसित सूची निकालें, उसमें से दो किस्में चुनें जिनके पकने के दिन 5-7 दिन अलग हों, और प्रमाणित टैग वाला बीज ही लें। फिर अंकुरण जांचें और बीज उपचार तैयार रखें। दलहन की अगली फसल की योजना बनानी हो तो मटर की खेती देखें; वहां भी राइज़ोबियम का वही तर्क काम करता है।

Frequently Asked Questions

सोयाबीन की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है? +

कोई एक किस्म हर जगह सबसे अच्छी नहीं है। मध्य भारत में ICAR-आधारित जानकारी के हिसाब से NRC 86, NRC 157, NRC 131 और JS 20-29 अच्छे विकल्प हैं। अपने जिले की अनुशंसा KVK से पूछकर तय करें।

भारत में सोयाबीन की टॉप 5 किस्में कौन सी हैं? +

इस सूची में पुष्ट आंकड़ों के आधार पर NRC 86, NRC 157, JS 20-29, NRC 136 और NRC 131 प्रमुख हैं। 'टॉप 5' का कोई सरकारी रैंक नहीं होता; क्षेत्र, बुवाई तारीख और रोग की स्थिति से सूची बदलती है।

जल्दी पकने वाली सोयाबीन की कौन सी किस्म है? +

NRC 131 लगभग 93 दिन, NRC 157 लगभग 94 दिन और JS 20-29 लगभग 93-96 दिन में पकती हैं। देर से बुवाई की स्थिति में NRC 157 को ICAR-IISR ने 20 जुलाई तक की बुवाई के लिए उपयुक्त बताया है।

ज्यादा उपज देने वाली सोयाबीन की किस्म कौन सी है? +

प्रकाशित औसत में NRC 86 और JS 20-29 लगभग 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और NRC 37 (गुजरात) लगभग 22.8 क्विंटल देती हैं। ये परीक्षण के औसत हैं, खेत की उपज बारिश और प्रबंधन पर निर्भर रहेगी।

मध्य प्रदेश के लिए सोयाबीन की कौन सी किस्म सही है? +

ICAR-IISR के अनुसार NRC 157, NRC 131 और NRC 136 को मध्य प्रदेश के लिए अनुशंसा मिली है, और NRC 86 व JS 20-29 भी मध्य क्षेत्र की किस्में हैं। जिले के हिसाब से अंतिम पुष्टि JNKVV या KVK से कराएं।

सोयाबीन कितने प्रकार के होते हैं? +

पकने की अवधि के आधार पर जल्दी, मध्यम और देर, बढ़वार के आधार पर निश्चित और अर्ध-निश्चित, और उपयोग के आधार पर तिलहन व प्रोटीन वाली किस्में। भारत में ज्यादातर किस्में तिलहन उपयोग के लिए बनी हैं।

पीला मोज़ेक रोग में कौन सी सोयाबीन किस्म सहनशील है? +

महाराष्ट्र के लिए जारी AMS-1001 में पीला मोज़ेक के प्रति उच्च प्रतिरोध बताया गया है, और NRC 136 में MYMV के प्रति मध्यम प्रतिरोध। फिर भी सफेद मक्खी की निगरानी जरूरी है, क्योंकि पूर्ण रोग-रोधी किस्म नहीं होती।

सोयाबीन का बीज कितना लगता है प्रति एकड़? +

सामान्यतः 25 से 30 किलो प्रति एकड़, दाने के आकार और अंकुरण के अनुसार। अंकुरण 70% से कम निकले तो मात्रा बढ़ाएं या बीज बदलें। बुवाई से पहले 100 दाने की जांच कर लें।

सोयाबीन की अच्छी किस्म की पहचान क्या है? +

अच्छी किस्म आपके क्षेत्र के लिए अनुशंसित हो, 93-105 दिन में पके, आपके खेत के आम रोग के प्रति सहनशील हो और प्रमाणित टैग वाले बीज में उपलब्ध हो। सिर्फ ज्यादा उपज का दावा देखकर चुनाव न करें।

क्या अपना रखा हुआ सोयाबीन बीज दोबारा बो सकते हैं? +

बो सकते हैं, पर पहले अंकुरण जांचें। 70% से ऊपर हो तभी बोएं। सोयाबीन का बीज भंडारण में जल्दी अंकुरण क्षमता खोता है, और हर 3-4 साल में प्रमाणित बीज से बदलना शुद्धता और रोग के लिए बेहतर रहता है।

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